यह फरक होता है शेर और इन्सान में

हँसते हैं शेर। शेर हँसते हैं। कहाँ हँसते हैं शेर ? शेर दहाड़ते हैं। एक दहाड़ शेर की और सब शांत। सिर्फ एक दहाड़ में। ऐसा कुछ करना ज़िन्दगी में। एक दहाड़ और ज़िन्दगी का सारा कोहराम शांत हो जाये। ज़िन्दगी को भी पता लग जाये की उसने किसी शेर को जन्म दिया है। न की किसी गीदढ़ या बन्दर को।

हम इन्सान हैं। हम शेर तो नहीं बन सकते। पर अपने इरादों और अटूट होंसले से अपनी दहाड़ ज़िन्दगी को सुना सकते हैं। अपने होंसले को बरकरार रखने के लिए तुम्हे जो करना हो वो करो। पर इस होंसले को कभी जाने मत दो। एक यही तो औज़ार, हथियार, सहारा और दोस्त है हमारे पास जो इस ज़िन्दगी को जीना मुमकिन बनता है।